भारत में नागरिक विज्ञान अनुसंधान के लिए RAD@home Astronomy Collaboratory के साथ काम कर रही खगोलविदों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने LOFAR रेडियो दूरबीन की अत्यंत संवेदनशील तस्वीरों की मदद से धनुष-बाण के आकार वाली एक असाधारण रेडियो आकाशगंगा खोजी है। इस नए स्रोत में करीब 18 लाख प्रकाश-वर्ष तक फैली एक विशाल चाप जैसी संरचना दिखाई देती है। यह किसी आकाशगंगा के ध्वनि से तेज़ गति से आकाशगंगा-समूह के परिवेश में गिरने पर बनी विशाल बो-शॉक, यानी धनुषाकार आघात-तरंग, का अब तक का सबसे स्पष्ट रेडियो संकेत हो सकता है।
**चित्र विवरण:** धनुष-बाण के आकार की रेडियो आकाशगंगा RAD-BAARG। इसमें LOFAR रेडियो दूरबीन से 144 MHz पर ली गई रेडियो छवि लाल रंग में दिखाई गई है, जबकि BASS सर्वेक्षण की ऑप्टिकल छवि RGB रंगों में है। श्रेय: Hota et al. (2026) और RAD@home Astronomy Collaboratory
RAD-BAARG के बनने की प्रक्रिया पर आधारित कलात्मक एनीमेशन यहाँ देखा जा सकता है: https://youtu.be/kHu46vgeB4Y
यह खोज LOFAR Two-metre Sky Survey (LoTSS) के डेटा से हुई। LoTSS कम आवृत्तियों पर किए गए अब तक के सबसे गहरे रेडियो सर्वेक्षणों में से एक है। इस स्रोत का नाम RAD-BAARG रखा गया है, यानी Bow-And-Arrow Radio Galaxy। इसकी बनावट अत्यंत असामान्य और असममित है; सामान्य रेडियो आकाशगंगाओं में ऐसी संरचना नहीं दिखती।
रेडियो आकाशगंगाओं को उनके केंद्रों में मौजूद अति-विशाल ब्लैक होल ऊर्जा देते हैं। ये ब्लैक होल सापेक्षिक गति वाले चुम्बकीय प्लाज़्मा की विशाल धाराएँ, यानी जेट, अंतर-आकाशगंगीय अंतरिक्ष में फेंकते हैं। RAD-BAARG में एक जेट ऐसी बड़ी बो-शॉक जैसी संरचना से टकराता हुआ दिखाई देता है। यह संरचना संभवतः तब बनी जब इसकी मूल आकाशगंगा आसपास की गर्म गैस से गुजरते हुए पास के आकाशगंगा-समूह की ओर बढ़ी।
जैसे ध्वनि से तेज़ उड़ते विमान के आगे आघात-तरंग बनती है, वैसे ही कोई आकाशगंगा यदि अपने चारों ओर फैली आकाशगंगा-समूह की गैस में ध्वनि से तेज़ गति से चलती है, तो वह गैस को दबाकर बड़े पैमाने की शॉक फ्रंट बना सकती है। RAD-BAARG से निकला रेडियो-उत्सर्जक प्लाज़्मा इस बेहद धुंधली संरचना को प्रकाशित करता हुआ प्रतीत होता है। इसी कारण वह कम आवृत्ति वाली रेडियो तस्वीरों में दिखाई दे रही है।
स्रोत के पश्चिमी हिस्से में एक पतला जेट है, जो पंखे या खंड के आकार वाले उत्सर्जन क्षेत्र और लगभग 560 किलोपारसेक, यानी 18 लाख प्रकाश-वर्ष, तक फैली विशाल चाप जैसी संरचना को ऊर्जा देता है। दूसरी ओर जेट की बनावट मुड़ी-तुड़ी S-आकार की हो जाती है, जिसके बाद लगभग 600 किलोपारसेक तक फैली एक धुंधली, थोड़ी हटकर स्थित पूँछ दिखाई देती है। पूरी संरचना बताती है कि रेडियो प्लाज़्मा और आसपास के बड़े ब्रह्मांडीय परिवेश के बीच तीव्र अंतःक्रिया हो रही है।
शोध टीम ने पाया कि मूल आकाशगंगा एक जटिल और गतिशील परिवेश में स्थित है, जहाँ लगभग समान दूरी पर आकाशगंगा-समूह जैसी कई प्रणालियाँ मौजूद हैं। देखी गई आकृति रेडियो जेटों और बड़े पैमाने के पर्यावरणीय ढालों, गैस के सामूहिक बहावों, तथा आकाशगंगा के समूह में गिरने से जुड़े संभावित शॉक-संपीड़न के बीच अंतःक्रिया से मेल खाती है।
सैद्धांतिक अध्ययनों और कंप्यूटर सिमुलेशनों ने काफी पहले से अनुमान लगाया था कि आकाशगंगा-समूहों में गिरती आकाशगंगाओं के आसपास बो-शॉक बन सकती हैं। लेकिन उन्हें सीधे देखना बहुत कठिन रहा है, क्योंकि आसपास की गैस अत्यंत फैली हुई और धुंधली होती है। पहले कुछ संभावित उदाहरण एक्स-रे प्रेक्षणों में मिले थे, पर RAD-BAARG ऐसी घटना का असाधारण रूप से विस्तृत रेडियो दृश्य देता है।
RAD@home Astronomy Collaboratory के संस्थापक निदेशक, प्रधान अन्वेषक और शोधपत्र के प्रमुख लेखक डॉ. आनंद होता कहते हैं, "पिछले 25 वर्षों में मैंने जितनी रेडियो आकाशगंगाएँ देखी हैं, उनमें इस स्रोत की संरचना सबसे अलग है। इसकी उल्लेखनीय आकृति ऐसा संकेत देती है कि सापेक्षिक रेडियो प्लाज़्मा और पास के आकाशगंगा-समूह में गिरती आकाशगंगा से बनी बड़े पैमाने की शॉक संरचना के बीच अंतःक्रिया हो रही है।"
पोलैंड के National Centre for Nuclear Research से जुड़े एक अन्य प्रमुख लेखक डॉ. प्रतीक दभाडे कहते हैं, "BAARG सिर्फ़ अपने आकर्षक धनुष-बाण आकार के कारण रोचक नहीं है। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एक जटिल बहु-हेलो परिवेश में है, जहाँ गैस का बहाव, इनफॉल और संभावित शॉक रेडियो प्लाज़्मा की आकृति बदल सकते हैं। LOFAR हमें इस धुंधले, कम सतही-चमक वाले उत्सर्जन को बहुत विस्तार से देखने देता है। LoTSS DR3 और भविष्य के SKAO की मदद से हमें ऐसी कई और प्रणालियाँ मिल सकती हैं, जहाँ रेडियो आकाशगंगाएँ जेटों, आकाशगंगाओं और उनके परिवेश के बीच की वे अंतःक्रियाएँ दिखाती हैं जो सामान्यतः अदृश्य रहती हैं।"
SRM University Sikkim, भारत के Center for Astrophysics, Gravitation and Cosmology (CAGC) से जुड़े प्रमुख लेखकों में से एक डॉ. शुभ्रांग्शु घोष कहते हैं, "यह प्रेक्षण रेडियो आवृत्तियों पर उस विशिष्ट चापाकार संरचना की पहली सीधी छवि दिखाता है, जो बहुत संभव है कि किसी आकाशगंगा-समूह के माध्यम में ध्वनि से तेज़ गति से गिरती रेडियो आकाशगंगा से जुड़ी हो। यह बड़े पैमाने की बो-शॉक का पाठ्यपुस्तक जैसा शानदार उदाहरण है। SKA युग में ऐसे और स्रोतों की खोज और उनका अध्ययन हमें जेट और आसपास के माध्यम की अंतःक्रिया तथा उससे जुड़े फीडबैक प्रक्रियाओं को कहीं गहराई से समझने में मदद देगा।"
शॉक संरचना के बारे में बताते हुए Amity University, Noida के डॉ. चिरंजीब कोनार, जो RAD@home Astronomy Collaboratory के पेशेवर सदस्य भी हैं, कहते हैं, "खगोलभौतिकीय रेडियो जेटों के अग्रभाग के आसपास इस तरह की विशाल धनुषाकार संरचना पहले कभी नहीं देखी गई है। इस धनुषाकार संरचना के आर-पार तापमान, दबाव, घनत्व और चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता में अचानक बदलाव होने चाहिए, और इनके ऊँचे मान धनुष के भीतरी हिस्से में होने की उम्मीद है।"
इस असामान्य स्रोत पर सबसे पहले RAD@home के नागरिक वैज्ञानिक श्री प्रनिम लिंबू की नज़र पड़ी। वे LOFAR सर्वेक्षण की छवियाँ देख रहे थे। हिमालयी क्षेत्र के एक दूरस्थ पहाड़ी इलाके से आने वाले प्रनिम के पास किसी बड़े खगोल विज्ञान संस्थान तक पहुँच नहीं थी। यह खोज दिखाती है कि RAD@home द्वारा शुरू किया गया सहयोगी नागरिक विज्ञान मॉडल विश्वविद्यालय के छात्रों और उत्साही शिक्षार्थियों को, उनकी भौगोलिक या संस्थागत पृष्ठभूमि से परे, अग्रणी खगोलीय शोध में सीधे भाग लेने का अवसर दे सकता है।
2013 से RAD@home भारत भर के प्रतिभागियों को विश्व-स्तरीय दूरबीनों से मिले खगोलीय डेटा का विश्लेषण करना सिखा रहा है, ताकि वे पेशेवर वैज्ञानिक खोजों में योगदान दे सकें।
श्री लिंबू कहते हैं, "मैं RAD@home का हार्दिक धन्यवाद करता हूँ कि उन्होंने ऑनलाइन सप्ताहांत ई-कक्षाओं, मार्गदर्शन और बहु-तरंगदैर्ध्य डेटा पर हाथों-हाथ शोध के माध्यम से रेडियो खगोल विज्ञान सीखने का एक अनूठा मंच दिया। उनके मार्गदर्शन और सहयोगी पद्धति ने मुझे शोध कौशल विकसित करने और इस प्रकाशन तक पहुँचे वैज्ञानिक कार्य में योगदान देने में मदद की।"
यह खोज Square Kilometre Array Observatory (SKAO) जैसी अगली पीढ़ी की रेडियो खगोल विज्ञान सुविधाओं के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत देती है। SKAO अभी निर्माणाधीन है और इसके दुनिया की सबसे शक्तिशाली रेडियो दूरबीन बनने की उम्मीद है। भविष्य के अत्यंत संवेदनशील सर्वेक्षण आकाशगंगा-समूहों में गिरती आकाशगंगाओं के आसपास शॉक-संबंधित अंतःक्रियाओं के कई और उदाहरण खोज सकते हैं। इससे खगोलविदों को यह समझने में मदद मिलेगी कि रेडियो आकाशगंगाएँ बड़े पैमाने के ब्रह्मांडीय परिवेश में कैसे विकसित होती हैं।
टीम को यह भी उम्मीद है कि ऐसी दुर्लभ आकृतियों के आधार पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन-लर्निंग तकनीकों को प्रशिक्षित किया जा सकता है, ताकि आने वाले रेडियो आकाश सर्वेक्षणों से मिलने वाले विशाल डेटा में छिपी अन्य असामान्य रेडियो आकाशगंगाएँ पहचानी जा सकें।
डॉ. होता, डॉ. दभाडे, डॉ. घोष, डॉ. कोनार और श्री लिंबू के अलावा खोज टीम में डॉ. सागर सेठी (University of Warmia and Mazury, पोलैंड), श्री सौविक माणिक (Midnapore City College, भारत), श्री आदित्य सहस्रांशु (RAD@home) और डॉ. सब्यसाची पाल (Midnapore City College, भारत) शामिल हैं। टीम के अन्य सदस्य डॉ. मिताली दामले (New York University Abu Dhabi, UAE), डॉ. स्रावणी वड्डी (RAD@home) और सुश्री अरुंधति पुरोहित (RAD@home) हैं।
"RAD@home discovery of a bow-and-arrow radio galaxy tracing a ∼560 kpc bow-shock structure in a multi-halo environment" शीर्षक वाला शोधपत्र Oxford University Press द्वारा Monthly Notices of the Royal Astronomical Society: Letters में प्रकाशित किया गया है। DOI: https://doi.org/10.1093/mnras/stag1033
विज्ञान संपर्क: डॉ. आनंद होता (RADatHomeIndia _AT-SIGN_ gmail DOT com)
Founder Director and Principal Investigator, RAD@home, India
UGC faculty @ CEBS & CETACS, University of Mumbai, India
Royal Astronomical Society (RAS, UK) की प्रेस विज्ञप्ति: https://ras.ac.uk/news-and-press/research-highlights/bow-and-arrow-shaped-radio-galaxy-discovered-citizen-scientist
National Centre for Nuclear Research (NCBJ, Poland) की प्रेस विज्ञप्ति: https://www.ncbj.gov.pl/en/news/cosmic-bow-and-arrow-supersonic-radio-galaxy-tracing-giant-bow-shock
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